Monday, August 19, 2024

ये किस तरह के जाने तुम हो गए हो

 मेरे पास आकर, मुझसे दिल लगा कर मे

रे ज़ख्मों को थोड़ा सा अपना बनाकर

अचानक से ऐसे जो गुम हो गए हो,

ये किस तरह के जाने तुम हो गए हो


वो सुबहें, वो शामें, वो रातें, वो बातें

वो कॉफी के फ्लेवर में घुलती मुलाकातें

जिन्हें भूलकर तवह्हुम हो गए हो 

ये किस तरह के जाने तुम हो गए हो


वो दिन थे के सांसों में 

बस एक नाम तुम्हारा था,

हम तिरे इश्क में गाफिल थे

तुमने वक्त गुजारा था,

कहां मौज ए दरिया थे, ख़ुम हो गए हो 

ये किस तरह के जाने तुम हो गए हो


तव्वहुम—

 भ्रम में पड़ना,


खुम— मटका, घड़ा।


#मोहनगोडबोले"साहिल" –१९\८\२०२४